आज का विचार

वह ईश्वर अकाम ( सब कामनाओं से रहित) धीर, अमृत (अमर), स्वयम्भू, स्वयं ही अपनी सत्ता से प्रकट होने वाला), रस अर्थात आनंद से सर्वथा परिपूर्ण है कही से भी न्यून (अपूर्ण) नहीं है। उस अजर अमर सदा युवा परमात्मा को जानने वाला मनुष्य मृत्यु से नहीं डरता है।

  • कार्यक्रम :- योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर

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    स्थान
    पतंजलि योगपीठ, फेज-2, हरिद्वार

    आरंभ तिथि
    26-09-2018
    अंतिम तिथि
    30-09-2018

    समय
    05:00 प्रात: से 05:30 संध्या

    सम्पर्क सूत्र